Publicité
Publicité

Contenu connexe

Publicité

अनेकता में एकता.pptx

  1. अनेकता में एकता हमारा देश भारत विश्व में सिवश्रेष्ठ है, अनेकता में एकता ही इसकी अखंड पहचान है जो इसे विश्व क े अन्य देशों से अलग बनाती है क्ोंवक अन्य देशों में भारत की तरह अलग-अलग मजहब और धमव को मानने िाले लोग एकजुट होकर इस तरह प्रेम, भाईचारे और सद्भाि से नहीं रहते हैं। इसवलए भारतीय संस्क ृ वत की वमसाल विश्व भर में दी जाती है। यहां अलग-अलग धमों क े रहने िाले लोगों क े त्योहार, रीवत-ररिाज, पहनािा, बोली आवद में काफी विविवधता होने क े बाबजूद भी सभी मजहब क े लोग अपने-अपने तरीक े से रहते हैं और अपनी परंपरा और रीवत-ररिाजों क े साथ अपने त्योहार मनाते हैं। भारत एक ऐसा देश है, जहां दीपािली और ईद में वजतनी रौनक रहती है, उतनी ही रौनक विसमस औऱ गुरु पिव में भी देखने को वमलती है। भले ही सभी धमों क े अपने-अपने वसद्ांत हो, लेवकन यहां रहने िाले सभी धमव क े लोगों का वसफ व एक ही लक्ष्य भगिान की प्राप्ति है।
  2. ध्यान देने िाली बात यह है वक भारत की धरा पर प्रारंभ हुई इस सनातन संस्क ृ वत क े बाद अप्तित्व में आई वमस्र, यूनान और बेबीलोन की सभ्यतायें समय क े साथ नष्ट हो गई लेवकन भारतीय संस्क ृ वत सत्यं, वशिम, सुन्दरम क े अपने मंत्र क े साथ आज तक फल—फ ू ल रही है. इसी महान संस्क ृ वत ने सत्यमेि जयते, अवहंसा परमोधमव और िसुधैि क ु टुम्बकम जैसे पाठ पूरी दुवनया को पढाये. अनेकता में एकता का वसद्ांत
  3. अनेकता में एकता ही भारत की पहचान: भारत में “अनेकता में एकता” इसकी मूल पहचान है और यह भारतीय संस्क ृ वत और परंपरा को सबसे अलग एिं समृद् बनाने में मद्द करती है। हमारा देश भारत अनेकता में एकता की वमसाल है क्ोंवक भारत ही एक ऐसा देश है जो इस अिधारणा को बेहतरीन तरीक े से सावबत करता है। सही मायने में अनेकता में एकता ही भारत की अखंड शप्ति और मजबूती है, जो भारत को विकास क े पथ पर आगे बढाती है और इसकी एक अलग पहचान बनाती हैं। भारत में कई अलग-अलग प्रांत हैं, वजसमें रहने िाले सभी लोगों की भाषा, जावत, धमव, परंपरा, पहनािा आवद में काफी अंतर है जो वक (बंगाली, राजस्थानी, मारिाडी, पंजाबी, तवमलीयन, महाराष्टर ीयन) आवद क े रुपो में जाने जाते हैं, जो अपने आप को भारतीय कहते हैं और यही भारत में अनेकता में एकता को दशावता है। भारत में वहन्दू , मुप्तिम, वसक्ख, ईसाई सभी धमव क े लोग आपस में प्रेम, भाईचारे और सद्भाि क े साथ रहते हैं और एक-दू सरे क े मजहब, धमव, परंपरा और भाषा का आदर करते हैं, एक – दू सरे को प्यार से अपनाते हैं, यही भारत की सबसे बडी विशेषता है, जो वक अपने आप में अप्तद्तीय और अनूठी है।
  4. अनेकता में एकता का महत्व देश की आजादी से पहले जब भारत, अंग्रेजों का गुलाम था और अंग्रजों क े अत्याचारों और असहनीय पीडा को सह रहा था, उस दौरान सभी भारतीयों क े अंदर स्वतंत्रता पाने की इच्छा जागृत हुई और वफर आजादी पाने क े वलए काफी सालों तक संघषव की लडाई लडी। इस लडाई में सभी भारतीयों ने एकता को अपना सबसे बडा हवथयार मानकर वजस तरह अंग्रेजों को भारत से खदेड कर बाहर फ ें का और स्वाधीनता हावसल की, इसे अनेकता में एकता क े महत्व का पता लगाया जा सकता है। •अनेकता में एकता बुरी से बुरी पररप्तस्थवत से उभरने में मद्द करता है। •इससे लोगों क े अंदर एक-दू सरे क े प्रवत सम्मान और प्रेम की भािना विकवसत होती है और लोग एक-दू सरे क े करीब आते हैं। •आपसी ररश्ों और भािनाओं को और अवधक मजबूती वमलती है, इससे जीिन शैली, कायवक ु शलता, और उत्पादकता में सुधार आता है और देश क े विकास को बल वमलता है। •“विविधता में एकता” से लोगों को टीम िक व करने में मद्द वमलती है और उनक े अंदर आत्मविश्वास एिं मनोबल बढता है। •विविधता में एकता से ही लोगों को एक – दू सरे क े साथ प्रेम भाि से रहने में मद्द वमलती है और मुप्तिलों से लडने की वहम्मत वमलती है।
  5. भौगोलिक एकता  भारत की जलिायु, िनस्पवत और खवनज सम्पदा में वभन्नता है, वफर भी प्राक ृ वतक सीमाओं ने भारत को एकता क े सूत्र में बााँध रखा है. वहन्द महासागर क े उत्तर और वहमालय पिवत क े दविण में प्तस्थत यह देश हमेशा एक माना गया है. िे सभी भारतीय हैं जो इस देश में वनिास करते हैं.  यहााँ की प्रक ृ वत, नवदयों, पहाडों पहावडयों, झरने और लहलहाते खेतों, घने बागों आवद स्थानों से जुडाि सबको रहा है. वहमालय से लेकर वहन्द महासागर तक हमारा देश सांस्क ृ वतक दृवष्ट से एक ही है-  गंगा च यमुने चैि गोदािरी सरस्वती  नमवदे वसन्धु कािेरी जलेप्तिन सवन्नवध क ु रूम।  इस श्लोक में उत्तर भारत और दविण भारत की नवदयों का िरण एक साथ वकया गया है. इसी प्रकार पिवतों क े नाम िरण में भी सांस्क ृ वतक एकता क े दशवन होते हैं-  महेन्द्रो मलय सत्वः शप्तिमान ऋि पिवतः  विंध्यश्च पररयातुश्च सिैते क ु ल पिवतः  भारत की सांस्क ृ वतक धोवतका सि नगररयों का िरण भी एक साथ वकया जाता है-  अयोध्या, मथुरा माया, च काशी कांची अिप्तिका  पुरा द्वारािती चैि सिैते मोि दावयकाः ।
  6. भारत बहुभाषी देश है. यहााँ सैकडों बोवलयााँ बोली जाती हैं, वहन्दी हमारी राष्टर भाषा है. इन सब भाषाओं का स्रोत प्राक ृ त, संस्क ृ त और पाली है. अवधकांश भाषाओं की िणवमाला और व्याकरण समान है. संस्क ृ त भाषा ने दविण भारत की भाषाओं और उनक े सावहत्य को भी प्रभावित वकया है. भाषायी एकता
  7. सामालिक एकता समूचे देश में िणवव्यिस्था, जन्म मरण और वििाह क े संस्कार, अनुष्ठान आवद समान रूप से प्रचवलत हैं. जो विदेशी तत्व भारत में आये िे भी भारतीय संस्क ृ वत में समा गए. यही कारण है वक खानपान रहन-सहन, रीवत-ररिाज, विवध-विधान भारत क े विवभन्न भागों तथा समुदायों में प्रायः समान है.
  8. त्यौहारोों और उत्सवोों की अनेकता में एकता  भारत उत्सिों और त्यौहारों का देश है. यहााँ पर विवभन्न धमों क े लोग विवभन्न त्यौहार जैसे-रिाबंधन, दीपािली, दशहरा, ईदुलजुहा, मोहरवम, विसमसडे, दुगाव पूजा, गणगौर, पोंगल आवद त्यौहार मनाते हैं.  रामनिमी, वशिरावत्र, महािीर जयिी, बुद् जयिी आवद पर उत्सिों का आयोजन वकया जाता है. ये सभी उत्सि एिं त्यौहार भारत की विवभन्न संस्क ृ वतयों क े पररचायक हैं, इनका देश की जलिायु, संस्क ृ वत तथा इवतहास से अटू ट सम्बन्ध है. विवभन्न धमाविलम्बी इनक े आयोजनों में भाग लेते रहे है.  उदाहरणस्वरूप रिाबंधन का त्यौहार अथावत राखी, धमव सम्प्रदाय, भाषा, प्रांत और देश-विदेश की सीमाएं नहीं देखती, बप्ति हमें एक-दू सरे क े दुःख ददव में शरीक करक े परस्पर स्नेह क े बंधन में बााँधती चली जाती है.  रानी करणिती ने बहादुरशाह क े आिमण से स्वरिा क े वलए हुमायूाँ को राखी भेजी थी और राखी बंधन से भाई बनाकर उससे सहायता मााँगी थी. इससे वसद् होता है वक यहााँ क े त्यौहार विवभन्न जावतयों की राष्टर ीय एकता क े प्रतीक हैं.
  9. धालमिक एकता  वजन धमों का उदय भारत में हुआ (जैसे वहन्दू , जैन, बौद्, वसख आवद) िे प्राचीन मूल आध्याप्तत्मक तत्वों से ही वनकले हैं अतएि उनक े उपदेशों में आिररक समानता है. अन्य धमों ने (जैसे इिाम, ईसाई तथा पारसी) अपने आपको भारतीय पररप्तस्थवतयों क े अनुक ू ल ढाल वलया वजससे िे धमव भारत में फले-फ ू ले हैं. इन विवभन्न धमों क े मतािलम्बी देश क े समि भागों में हैं.  वकतनी जावतयााँ यहााँ घुली-वमलीं. उनकी अलग पहचान नहीं रह गई. गंगा की धारा में वजतनी नवदयााँ वमलीं सभी गंगा हो गईं. भारतीय संस्क ृ वत की सबसे बडी विशेषता यह है वक यह परायापन नहीं देखती, न मनुष्य की वकसी अन्य प्रजावत में, न जीि जगत में.  अकबर क े फतेहपुर सीकरी में जोधाबाई का महल और मधुबनी का वििाह मंडप दोनों ही इस देश क े भीतरी संस्कार को रूपावयत करते हैं. एक में फ ू ल पवत्तयों की सजािट है तो दू सरे में नक्काशी क े बेलबूटों की. अकबर ने राम-जानकी क े वसक्क े ढलिाये थे.  उत्तर भारत में प्तस्थत बद्रीनाथ, पवश्चम भारत में द्वारका, दविण भारत में रामेश्वरम् और पूिव भारत में पुरी वहन्दू धमव क े महान तीथव हैं. इनक े अिगवत समि देश समा जाता है. ये तीथव भारत की सांस्क ृ वतक एकता और अखण्डता क े सशि प्रमाण हैं. वजन नवदयों का उल्लेख दैवनक प्राथवनाओं में वकया जाता है, िे भी भारत की मौवलक एकता की पररचायक हैं.
  10. किा की लवलवधता और एकता  भारत की प्राचीन मूवतवकलाएं तथा वचत्रकलाएं विश्वविख्यात है. वहन्दुओं क े मप्तन्दर विशुद् भारतीय शैली क े बने हुए हैं, उनमें जावत और धमव का कोई भेदभाि नहीं है. सभी मप्तन्दरों में मूवतवयों क े वलए गभवगृह है. खजुराहो, सोमनाथ, काशी, रामेश्वरम्, कोणाक व आवद क े मप्तन्दर उल्लेखनीय कलाओं क े नमूने हैं. मध्यकाल में इस कला का सम्पक व मुप्तिम कला से हुआ वजसक े पररणामस्वरूप दुगव, मकबरे, मवजस्दें आवद बने. इन कलाओं क े सम्पक व क े पररणामस्वरूप फतेहपुर सीकरी का विश्व प्रवसद् बुलन्द दरिाजा तथा संसार क े 8 आश्चयों में से एक आश्चयव ताजमहल का वनमावण भी भारत में ही हुआ है.
  11. सोंगीत में एकता  संगीत का तात्पयव िादन और नतवन से है. इिाम में संगीत को वनवषद् माना गया है वफर भी मध्यकाल में संगीत का कावबले तारीफ विकास हुआ है.  इस पहचान क े कारण क ु छ नकली भेद क ु छ विशेष िेत्रों में वकए पर वहन्दू , कविता, मुप्तिम कविता या मुप्तिम संगीत, वहन्दू संगीत जैसे भेद विकवसत नहीं हुए…  अकबर क े दरबार में 36 उच्चकोवट क े गायक थे, वजसमें तानसेन और बैजूबािरा उल्लेखनीय हैं. सूफी संत गजल और कब्बाली क े रूप में खुदा की इबादत करते थे तो भि संतों ने भजन और कीतवन क े वलए संगीत का उपयोग वकया.
  12. मध्यकािीन समन्वयता या एकता  मध्यकाल में जब दू सरी जावतयााँ भारत में आकर बसने लगीं उस समय वहन्दुओं में अनेक जावतयााँ, सम्प्रदाय तथा पंथ थे तथा छु आछु त प्रथा प्रचवलत थी. उस समय क े वहन्दू समाज को एक ऐसा समाज का सामना करना पडा वजसमें न तो जावत प्रथा थी और न सामावजक भेदभाि था. इससे वहन्दुओं की आिररक शप्ति को जाग्रत करने में सहायता प्राि हुई.  धीरे-धीरे मुसलमान भी भारत को अपना देश समझने लगे तथा धीरे-धीरे िे वहन्दुओं क े वनकट आने लगे. इस सम्पक व का प्रभाि दैवनक वियाओं तथा धमव तक पडा. वििाह क े समय मााँग भरने की प्रथा मुसलमानी मवहलाओं में प्रचवलत हुई. वहन्दू मुसलमान एक-दू सरे क े त्यौहारों, उत्सिों में सप्तम्मवलत होने लगे जो आज भी जारी है.  धीरे-धीरे एक-दू सरे ने एक-दू सरे क े गुण-दोष दोनों अपना वलए. शायद दोष अवधक, पर क ु ल ले देकर साथ बैठकर एक- दू सरे क े हास-पररहास तक में वहन्दू मुसलमान वमल गए.  इस प्रकार हम कह सकते हैं वक कई विषमताओं और वभन्नताओं क े होते हुए भी भारतीय संस्क ृ वत में मौवलक एकता विद्यमान है. इस मौवलक एकता को कोई भी विद्वान अस्वीकार नहीं करता है.
  13. धन्यिाद
Publicité