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Prashant Tripathi: यह तो प्रार्थना नहीं

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Following presentation is an excerpt from discourse given by Shri Prashant on behalf of Advait Life-Education at Krishna Engineering College, Ghaziabad on 3rd April, 2012.

Clarity sessions are held at Advait office every Sunday 10.00 am and Wednesdays at 7.00 pm. All are welcome!

Advait Learning camps in Himalayas, led by Shri Prashant, are organised at regular intervals. To participate, contact 0120-4560347.

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Prashant Tripathi: यह तो प्रार्थना नहीं

  1. 1. श्री प्रश ांत यह तो प्रार्थना नहीं पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  2. 2. यह तो प्रार्थना नहीं नियम पूर्वक पढ़े कु छ शब्द म ांग, मुर द एक नर्शेष निय सुिी सुि ई पर सर झुक ि पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  3. 3. परम को परम से माांगना सो ही है प्रार्थना पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  4. 4. प्रार्थना से मन बदलें “लिन्दगी को पूरी समग्रता में जीने की कला है प्रार्थना ” पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  5. 5. “जो सबसे महान लेन-देन संभव है वह है प्रार्थना” प्रार्थना में अपने सीलमत सेल्फ (अहंकार) का समपथण करते हैं और असीलमत को पाते हैं। पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  6. 6. पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  7. 7. प्रार्थना का भाव क्या हो? “ मैं तुममें समलपथत हो गया । मैं अपना अहंकार तुमको दे रहा हूँ । और वह देते ही मैं तुम्हारे जैसा हो गया । यह छोटा-सा अहंकार देकर मुझे इतना सारा लमल गया । धन्यवाद! ” पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
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  9. 9. पर क्या अहंकार खुद कभी मरना चाहेगा? पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
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  11. 11. मन ये बात अच्छे से जानता है लक लवचललत होने में समपथण नहीं हो सकता, इसीललए प्रार्थना में, मेलिटेशन में, लोगों को बड़ी लदक्कत आती है । • मन में लवचार उठते हैं । • अनावश्यक कामनाएूँ उठने लगती हैं । • कई लोगों के शरीर में कु छ होने लगता है । लवचललत होने में समपथण नहीं हो सकता पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  12. 12. अब कै से सांभव है कक अहांकार को नष्ट ककया जा सके ? पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  13. 13. पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  14. 14. तुम स ाँप को तभी तक तो पकड़े रहोगे, जब तक नहीं ज नते कक यह स ाँप है । कजस क्षण तुम ज न गए कक यह स ाँप है, तुम उसे छोड़ देते हो । “ अहंक र को तुम तब तक पकड़े रहते हो, जब तक नहीं ज नते कक यह मेरे किए घ तक है । ” prashantadvait.com | advait.org.in
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  19. 19. कहते हैं, ‘भगवान उनकी मदद करता है जो अपनी मदद करते हैं’ पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  20. 20. लबल्कु ल पागलपन की बात है पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  21. 21. “ भगवान उनकी मदद करता है जो अपनी मदद नहीं करते । ” तुम अपनी मदद खुद करने को आतुर हो वह तुम्हारी मदद कै से करे ? पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  22. 22. पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  23. 23. तुम्हें असीलमत की प्रलतलिया करने के ललए जगह बनानी पड़ेगी । और वह जगह तभी बन सकती है, जब तुम इस तुच्छ अहंकार से परे हो जाओ । पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  24. 24. “अलततत्व अपना काम कर देगा । तुम्हारी पुकार सुनी जाएगी । पर क्योंलक अलततत्व पूणथ है, उसके काम करने का तरीका भी पूणथ है । और तुम्हारी मांग है सीलमत ।” पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  25. 25. तुम योजनाएूँ बनाते, हो तरकीबें बनाते हो, जुगत लभड़ाते हो ! • मैं ऐसा कर जाऊूँ गा • मैं वैसा कर जाऊूँ गा • मैं इन्शुरन्स खरीद लूूँगा • मैं मदद करूँ गा • मैं लनणथय करूँ गा • मैं मौत को मात दे दूूँगा पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  26. 26. मैं पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  27. 27. तुम र्ोड़ा इस करने से बाज आओ तो वह भी कु छ करे । इतना कताथ होना बांद करो । “अहंकार लसफथ कताथभाव में ही पनप सकता है ।” पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  28. 28. प्रवाह के सार् बहो । बहने का मतलब आलसी होकर बैठना नहीं है । बहने में िबरदतत कारवाई होती है । पर वह करवाई अहंकार की नहीं होती । वह तुम्हारे तवभाव के कमथ होंगे । पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  29. 29. वह अपने आप में एक प्रार्थना से पूर्थ किन्दगी है । समाज में इसका कवपरीत होता है । ऐसी किन्दगी कजयो जो शाांकत में हो ! जो अभय में हो ! पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  30. 30. जब प्रार्थना अपने मतलब, इच्छाओंकी पूलतथ या पाप धोने के ललए की जाए तो यह लसफथ अहंकार का ही एक रप होगी । “ यह प्रार्थना नहीं है । इसको प्रार्थना मत मान लेना । ” पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  31. 31. प्रार्थना में कोई इच्छा नहीं रखी जाती । “प्रार्थना तभी हो सकती है जब कामनाएँ ना हों ।” पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  32. 32. “कसर्थ प्रार्थना मत कररए प्रार्थना से भरी लिन्दगी जीयें” पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  33. 33. 33 www.prashantadvait.com www.advait.org.in पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं
  34. 34. लेखक नशक्षक उपिमी, और इि सब के प र अद्वैत ल इफ -एजुके शि सांस्थ के म गवदशवक, सांच लक उिके िेतृत्र् में निम लय की गोद में आयोनजत बोध नशनर्रों में क ल तीत बोध- स नित्य क जन्म िो रि िै पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  35. 35. जीवन-सम्बंकित व त ाओं एवं व्य ख्य नों में संिग्न । वेद ंत एवं सभी समयों एवं स्थ नों के आध्य कममक स कहमय पर प्रवचन देन भी अमयकिक कप्रय । उनके वचनों ने एक कवकिष्ट बोि-स कहमय को जन्म कदय है । (www.prashantadvait.com) अद्भुत हैं अकस्तमव के तरीके । आइआइटी और आइआइऍम से प्रौद्योकगकी और प्रबंिन की किक्ष प्र प्त करने के पश्च त्, और कवकभन्न उद्योगों में कुछ समय के उपर न्त, समय तीत की सेव की ओर उन्मुख हुए। पूरा लेख पढ़ने के ललये यह तो प्रार्थना नहीं prashantadvait.com | advait.org.in
  36. 36. श्री प्रश ांत के स थ बोि सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में आयोकजत ककये ज ते हैं रकवव र सुबह १०.०० एवं बुिव र ि म ७.०० बजे सभी क स्व गत है! इस एवं ढेरों अन्य कवकियो की प्रकतकिकप पढ़ने के किए सदस्य बनें (सब्सक्र इब करें – कोई िुल्क नहीं) www.youtube.com/c/PrashantTripathi01 www.youtube.com/c/ShriPrashant www.pinterest.com/prashantekarshi/ soundcloud.com/shri-prashant-tripathi www.mixcloud.com/Shri Prashant Tripathi www.prashantadvait.com

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