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लेखक दशक्षक उपक्रमी,
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सभी समयों एवां स्थ नों के आध्य दत्मक स दहत्य पर प्रवचन ...
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श्री प्रश ांत के स थ बोध सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में
आयोदजत दकये ज ते हैं
रदवव र सुबह ९.०० एवां बुधव र श म ६.३...
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Prashant Tripathi: संवेदनशीलता, भावुकता नहीं

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Following presentation is an excerpt from discourse given by Shri Prashant in Clarity Session at Advait Life-Education on 28th September, 2014.

Clarity sessions are held at Advait office every Sunday 9 am and Wednesdays at 6:30 pm. All are welcome!

Advait Learning camps in Himalayas, led by Shri Prashant, are organised at regular intervals. To participate, contact 0120-4560347.

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Prashant Tripathi: संवेदनशीलता, भावुकता नहीं

  1. 1. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं संवेदनशीलता, भावुकता नहीं श्री प्रश ांत
  2. 2. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं प्रश्न
  3. 3. www.advait.org.in www.prashantadvait.com संवेदनशीलता क्या है? पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं प्रश्न
  4. 4. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं संवेदना सम् वेदन मूल शब्द है ‘ववद्’, ‘ववद्’ अर्ाात ‘जानना’
  5. 5. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं वेदना, ववद्या और वेद - इनके भी मूल में ‘ववद्’ है
  6. 6. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  7. 7. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
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  9. 9. www.advait.org.in www.prashantadvait.com यंत्र को वेदना का अनुभव नहीं होता पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  10. 10. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  11. 11. www.advait.org.in www.prashantadvait.com यदद पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  12. 12. www.advait.org.in www.prashantadvait.com यदद ये शुभ लक्षण हैं पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  13. 13. www.advait.org.in www.prashantadvait.com इससे यही पता चलता है वक अभी भीतर कोई है, जो तुमको पुकार- पुकार कर कह रहा है, “बदलो, बदलो, ये ठीक नहीं है। इसी कारण कष्ट है तुम्हें।” ये शुभ लक्षण हैं कष्ट का अर्थ ही है कक भीतर चेतना का स्रोत बैठा हुआ है। पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  14. 14. www.advait.org.in www.prashantadvait.com साधारण मन, सोया हुआ मन, वेदना को मात्र कष्ट समझता है, पीड़ा समझता है वो वेदना का अर्थ ज्ञान से ले नहीीं पाता संवेदना का अर्ा है - “मेरे भीतर वो बैठा हुआ है, वो जानने वाला, और उसकी दृवष्ट से मैं पूरी दुवनया को देख रहा हूँ। वजतने कष्ट हैं सब साफ़ वदखाई दे रहे हैं, और मैं उनका सही अर्ा भी कर पा रहा हूँ।” संवेदना ही करुणा है। पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  15. 15. www.advait.org.in www.prashantadvait.com यवद अज्ञान है तो वेदना मात्र कष्ट बनेगी, और यवद ज्ञान है वेदना कष्ट नहीं, करुणा बनेगी। जब वेदना करुणा बन जाये तो उसे संवेदना कतते त। करुणा का अर्ा दया नहीं है। करुणा का अर्थ है - मैं ठीक-ठीक जान रहा हूँ वक तुम्हारा कष्ट नकली है। मैं कष्ट की वास्तववकता जान गया हूँ। संवेदना के मूल में भावुकता नहीं है, दवद्या है। जब तुम जान जाते हो कक कष्ट नकली है, तभी तुम उसके कष्ट का उपचार भी कर सकते हो। पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  16. 16. www.advait.org.in www.prashantadvait.com तुम कै से ककसी की मदद करोगे जब तुम खुद को ही समझते नहीं? डूबते हुए की मदद उसके साथ डूब कर नहीं की जा सकती। पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  17. 17. www.advait.org.in www.prashantadvait.com सेवा का क्या अर्ा है? पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं प्रश्न
  18. 18. www.advait.org.in www.prashantadvait.com अस्पत ल में मरीज है, डॉक्टर कै से सेव करेग ? तुम्हें शरीर क कुछ पत नहीं, मन क कुछ पत नहीं, तुम्हें इल ज के औज रों क कुछ पत नहीं, तुम सेव कैसे करोगे? पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं
  19. 19. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं तुम में कोई योग्यता नहीीं है सेवा करने की। तुम कहते रहो कक मुझे सेवा करनी है, तुमसे होगी नहीीं सेवा, और सेवा के नाम पर तुम हत्या ज़रूर कर दोगे।  मााँ-बाप बच्ोीं की सेवा कर रहे हैं,  बच्े मााँ-बाप की सेवा कर रहे हैं,  पकियााँ पकत की सेवा कर रहीीं हैं,  पकत पकियोीं की सेवा कर रहे हैं, सेवा - जिसका फल है जहिंसा और उसके नाम पर वसफ़ा वहंसा हो रही है। सेवकों का जगत है ये, सब सेवक हैं, सब सेवा ही करने को आतुर हैं।
  20. 20. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं जब कोई आए और बड़ी उत्सुकत ददख ए दक आपकी सेव करनी है, तो इतन ज़रूर देख लेन दक उसने अपनी सेव कर ली है य नहीं। जो अपना कहतैषी नहीं हो पाया, वो तुम्हारा कहतैषी ्या ााक होगा। और जब तुम्ह रे मन में ये दवच र उठे दक मुझे दकसी की सेव करनी है, तो स्वयां से ये सव ल पूछ लेन , “क्य मैं इस क दबल हूँ।” अपनी सेव कर ली, दूसरों की सेव करने दनकल पड़े। “मैं ज रह हूँ सह र देने दुदनय को, और मुझे खुद सह रे की ज़रूरत है। अरे पररव र की ह लत बहुत खर ब है, मैं सह र दूांग ।” अपनी शक्ल देखो, तुमसे ज्य द बेसह र कोई है क्य ? सूत्र
  21. 21. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं अहंकार बड़ा घना है। तुम्हें अच्छा लगता है यह सोचकर कक मैं ककसी की सेवा कर सकता हूँ, ककसी को मेरी ज़रूरत है। आप थोड़ी देर के दलए आत्महत्य की कल्पन करके देदखये, की ज सकती है, जैसे जीवन एक कल्पन है, वैसे आत्महत्य की भी कल्पन भी की ज सकती है। आप थोड़ी देर के दलए आत्महत्य कर लीदजये, य दुदनय से ग यब हो ज इये, और देदखये दक दुदनय क चक्र पहले की तरह ही घूम रह है य नहीं।
  22. 22. www.advait.org.in www.prashantadvait.com यह प्रस्तुदत दनम्नदलदखत लेख क अांश है: “संवेदनशीलता, भावुकता नहीं” दक्लक करें @ संवेदनशीलता, भावुकता नह ं (श्री प्रशांत – Words into Silence) पूरे लेख को पढ़ने के कलए
  23. 23. www.advait.org.in www.prashantadvait.com पूरे लेख को पढ़ने के ललए, संवेदनशीलता, भावुकता नह ं दक्लक करें अगली स्ल इड पर पूर वीदडयो देखने के दलए
  24. 24. लेखक दशक्षक उपक्रमी, और इनसबके प र अद्वैत लाइफ-एजुके शन सांस्थ के म गगदशगक,सांच लक उनके नेतृत्व में दहम लय की गोद में आयोदजत बोध दशदवरों में क ल तीत बोध-स दहत्यक जन्महो रह है श्री प्रशांत वक्ता www.advait.org.in
  25. 25. जीवन-सम्बांदधत व त गओां एवां व्य ख्य नों में सांलग्न। वेद ांत एवां सभी समयों एवां स्थ नों के आध्य दत्मक स दहत्य पर प्रवचन देन भी अत्यदधक दप्रय। उनके वचनों ने एक दवदशष्ट बोध-स दहत्य को जन्म ददय है। (www.prashantadvait.com) अद्भुत हैं अदस्तत्व के तरीके। आइआइटी और आइआइऍम से प्रौद्योदगकी और प्रबांधन की दशक्ष प्र प्त करने के पश्च त्, और दवदभन्न उद्योगों में कुछ समय के उपर न्त, समय तीत की सेव की ओर उन्मुख हुए।
  26. 26. RS 08.06.15 श्री प्रश ांत के स थ बोध सत्र अद्वैत स्थल, नॉएडा में आयोदजत दकये ज ते हैं रदवव र सुबह ९.०० एवां बुधव र श म ६.३० बजे सभी क स्व गत है! इस एवां ढेरों अन्य दवदडयो की प्रदतदलदप पढ़ने के दलए सदस्य बनें (सब्सक्र इब करें – कोई शुल्क नहीं) @ www.prashantadvait.com www.youtube.com/c/PrashantTripathi01 www.youtube.com/c/ShriPrashant www.pinterest.com/prashantekarshi/ soundcloud.com/shri-prashant-tripathi yourlisten.com/Shri_Prashant_Tripathi

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