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दामोदर को सांप के काटने और साई बाबा द्वारा िबना
िकसी मंत-तंत अथवा दवा-दार के उसके शरीर से जहर
का बूंद-बूंद करके टपक जाना, ...
"हां, हां, हम साई बाबा का जुलिूस िनकालिेगे|" अभी
उपिस्थत विक एक स्वर मे बोलिे|
िफरर उसके बाद सब जुलिूस िनकालिने की तैयारी ...
इस बात को वह ढोग मान रहे थे| इसमे उनको साई
बाबा की कुछ चर्ालि नजर आ रही थी| वह गांव के लिोगो
का इलिाज भी िकया करते थे| साई...
"देखो न ! कैसे-कैसे चमतकार करता है !“
अब आस-पास के लोग िजनहोने साई बाबा के
चमतकार के बारे मे सुना, उनके दशरन करने के
िलए आ...
"यह गांव ही मूखो से भरा पडा है|" पंिडत ने कोध
से कांपते हए कहा - "वह कल का मामूली छोकरा
भला िसदपुरष कैसे हो सकता है ? कई-क...
"आप िबलकुल ठीक कहते है पंिडतजी!"-एक विक ने
कहा - "पनदह-सोलह वषर का छोकरा है और गांव वालो
ने उसका नाम रख िदया है 'साई बाबा'...
तभी अचानक झांझ, मदृंग, ढोल और अनय वाद्यो की
आवाज तथा लोगो का कोलाहल सुनकर पंिडतजी चौंक
गये| बाजो की आवाज के साथ-साथ जय-जयक...
साथ ही प्रतितिष्ठिष्ठितिष्ठ लोगो की भीड भी चल रही थी| इन
सबके साथ गांव की बहुतिष्ठ सारी महिहलाएं भी थी| ऐसा
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जैसे-जैसे शोभायात्रा आगे बढ़तिष्ठी जा रही थी और उसमहे
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कुछ ही व्यक्तिक रह गए| वह चुपचाप आँखे बंद िकये बैठे
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"जनमह देने वाले महातिष्ठा-िपतिष्ठा के प्रतेमह महे स्वाथर की भावना
िनिहतिष्ठ होतिष्ठी है| जबिक देवी महातिष्ठा-िपतिष्ठा के स...
"आप वासतव मे ही साई बाबा है|" सभी उपिसथत
लोगो ने एक सवर मे कहा - "आपने हम सभी को सही
रासता िदखाया है| सबको आपने ईशर की भिक...
उसके पास बुिद है, ज्ञान है और इसके बावजूद भी वह
मानव शरीर पाकर मोह-माया और वासना के दलदल मे
फं स जाता है| इससे छुटकारा पान...
"सच्चा गुर वही है, जो िशषय को अचछाई-बुराई का भेद
बता सके| उिचत-अनुिचत का अंतर बता सके|
आतमपकाश, आतमज्ञान दे सके| िजसके मन ...
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"तो आओ चलो, तातया को देख आये|" साई बाबा ...
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Shirdi Shri Sai Baba Ji - Real Story 013

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साईं बाबा की जय-जयकार - http://spiritualworld.co.in
दामोदर को सांप के काटने और साईं बाबा द्वारा बिना किसी मंत्र-तंत्र अथवा दवा-दारू के उसके शरीर से जहर का बूंद-बूंद करके टपक जाना, सारे गांव में इसी की ही सब जगह पर चर्चा हो रही थी|
गांव के कुछ नवयुवकों ने द्वारिकामाई मस्जिद में आकर साईं बाबा के अपने कंधों पर बैठा लिया और उनकी जय-जयकार करने लगे| सभी छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष साईं बाबा की जय-जयकार के नारे पूरे जोर-शोर से लगा रहे थे|
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  1. 1. दामोदर को सांप के काटने और साई बाबा द्वारा िबना िकसी मंत-तंत अथवा दवा-दार के उसके शरीर से जहर का बूंद-बूंद करके टपक जाना, सारे गांव मे इसी की ही सब जगह पर चर्चर्ार हो रही थी| गांव के कुछ नवयुवको ने द्वािरकामाई मिस्जद मे आकर साई बाबा के अपने कंधो पर बैठा िलिया और उनकी जय-जयकार करने लिगे| सभी छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष साई बाबा की जय-जयकार के नारे पूरे जोर-शोर से लिगा रहे थे| "हम तो साई बाबा को इसी तरह से सारे गांव मे घुमायेगे|" नयी मिस्जद के मौलिवी ने कहा - "मैंने तो पहलिे ही कह िदया था िक यह कोई साधारण पुरुष नही हैं| यह इंसान नही फरिरश्ते हैं| यह तो िशरडी का अहोभाग्य है िक जो यह यहां पर आ गए हैं|" 1 of 15 Contd…
  2. 2. "हां, हां, हम साई बाबा का जुलिूस िनकालिेगे|" अभी उपिस्थत विक एक स्वर मे बोलिे| िफरर उसके बाद सब जुलिूस िनकालिने की तैयारी करने मे लिग गये| यह सब देख-सुनकर पंिडतजी को बहत जयादा दुःख हआ| पूरे गांव मे केवलि वे ही एक ऐसे विक थे जो नये मंिदर के पुजारी के साथ-साथ पुरोिहताई और वैद का भी कायर िकया करते थे| यह बात उनकी समझ मे जरा- सी भी नही आयी िक साई बाबा के हाथ फरे रने से ही जहर कैसे उतर सकता है? 2 of 15 Contd…
  3. 3. इस बात को वह ढोग मान रहे थे| इसमे उनको साई बाबा की कुछ चर्ालि नजर आ रही थी| वह गांव के लिोगो का इलिाज भी िकया करते थे| साई बाबा के प्रतित उनके मन मे ईष्यार पैदा हो गयी थी| साई बाबा एक चर्मत्कारी पुरुष हैं, पंिडतजी इस बात को मानने के िलिए िबल्कुलि भी तैयार न थे| वह ईष्यार मे भरकर साई बाबा के िवरुद उल्टी-सीधी बाते बोलिने लिगे| सब जगह केवलि साई बाबा की ही चर्चर्ार थी| पर, पंिडतजी की ईष्यार का कोई िठकाना न था| "जरर कोई महात्मा हैं|“ "िसदपुरुष हैं|" 3 of 15 Contd…
  4. 4. "देखो न ! कैसे-कैसे चमतकार करता है !“ अब आस-पास के लोग िजनहोने साई बाबा के चमतकार के बारे मे सुना, उनके दशरन करने के िलए आ रहे थे| उधर पंिडतजी न नाग के जहर को शरीर से बूंद-बूंद कर टपक जाने की बात सुनी तो आगबबूला हो गये-और गांव के चौपाल पर बैठे लोगो से बोले- 4 of 15 Contd…
  5. 5. "यह गांव ही मूखो से भरा पडा है|" पंिडत ने कोध से कांपते हए कहा - "वह कल का मामूली छोकरा भला िसदपुरष कैसे हो सकता है ? कई-कई जनम बीत जाते है साधना करते हए, तब कही जाकर िसिद पाप होती है| नाग का जहर तो संपेरे भी उतार देते है| मुझे तो पहले ही िदन पता चल गया था िक वह कोई संपेरा है| एक संपेरो की ही ऐसी कौम होती है, िजनका कोई दीन-धमर नही होता| वह भला िसदपुरष कैसे हो सकता है?" 5 of 15 Contd…
  6. 6. "आप िबलकुल ठीक कहते है पंिडतजी!"-एक विक ने कहा - "पनदह-सोलह वषर का छोकरा है और गांव वालो ने उसका नाम रख िदया है 'साई बाबा'| यह साई बाबा का कया अथर होता है, पंिडतजी ! जरा हमे भी समझाइये?“ "इसका अथर तो तुम उनही लोगो से जाकर पूछो, िजनहोने उसका यह नाम रखा है|" पंिडतजी ने ईषयार मे भरकर कहा| िफर रहसयपूणर सवर मे बोले-"जाओ, पुरानी मिसजद मे देखकर आओ, वहां पर कया हो रहा है?" 6 of 15 Contd…
  7. 7. तभी अचानक झांझ, मदृंग, ढोल और अनय वाद्यो की आवाज तथा लोगो का कोलाहल सुनकर पंिडतजी चौंक गये| बाजो की आवाज के साथ-साथ जय-जयकार के नारे भी सुनायी दे रहे थे| उनहोने देखा, सामने से एक जुलूस आ रहा था| "पंिडतजी! बाहर आइए|साई बाबा की शोभायात्रा आ रही है|" एक विक ने बडे जोर से िचललाकर कहा| पंिडतजी उस नजारे को देखकर बडे हैरान थे| पालकी के आगे-आगे कुछ गांववासी झांझ, मंजीरे और ढोल बजाते हए चल रहे थे| उनके पीछे एक पालकी मे साई बाबा बैठे थे| दामोदर और उसके सािथयो ने पालकी अपने कंधो पर उठा रखी थी| उनके साथ गांव के पटेल भी थे और नई मिसजद के इमाम भी| 7 of 15 Contd…
  8. 8. साथ ही प्रतितिष्ठिष्ठितिष्ठ लोगो की भीड भी चल रही थी| इन सबके साथ गांव की बहुतिष्ठ सारी महिहलाएं भी थी| ऐसा लगतिष्ठा था िक जैसे सारा गांव ही उमहड पडा हो| सभी साई बाबा की जय-जयकार कर रहे थे| साई बाबा का ऐसा स्वागतिष्ठ-सत्कार देखकर पंिडितिष्ठजी के होश उड गये, महारे क्रोध के बुरा हाल हो गया| वह गला फाडकर िचल्लाकर बोले-"सत्यानाश! ये ब्राह्मण के लडके इस संपेरे के बहकावे महे आ गए है| यह बहुतिष्ठ बडा जादूगर है| नौजवानो को इसने अपने वश महे कर रखा है| यह बहुतिष्ठ बडा जादूगर है| नौजवानो को इसने अपने वश महे कर रखा है| देख लेना, एक िदन यह सब भी इसी की तिष्ठरह शैतिष्ठान बन जायेगे| हे भगवान! क्या महेरे भाग्य महे यह िदन भी देखना बाकी था?" 8 of 15 Contd…
  9. 9. जैसे-जैसे शोभायात्रा आगे बढ़तिष्ठी जा रही थी और उसमहे शािमहल होने वाले लोगो की भीड भी बढ़तिष्ठी जा रही रही, साई बाबा िक पालकी के आगे-आगे नवयुवक नाचतिष्ठे, गातिष्ठे और जय-जयकार से वातिष्ठावरण को गूंजा रहे थे| अपने-अपने घरो के दरवाजो पर खडी िस्त्रियां फू ल बरसाकर शोभायात्रा का स्वागतिष्ठ कर रही थी| पंिडितिष्ठजी से साई बाबा का यह स्वागतिष्ठ देखा न गया| वह गुस्से महे पैर पटकतिष्ठे हुए घर के अंदर चले गए और दरवाजा बंद करके, कमहरे महै जाकर पलंग पर लेट गए और महन-ही-महन साई बाबा को कोसने लगे| कैसा जमहाना आ गया है, इस कल के छोकरे ने तिष्ठो सारे गांव को िबगाडकर रख िदया है| पंिडितिष्ठजी को साई बाबा अपना सबसे बडा दुश्महन िदखाई दे रहे थे| जुलूस गांवभर महे घूमहतिष्ठा रहा और हर जबान पर साई बाबा की चचार होतिष्ठी रही| 9 of 15 Contd…
  10. 10. शोभायात्रा घूमहकर वापस लौट आयी|साई बाबा के पास कुछ ही व्यक्तिक रह गए| वह चुपचाप आँखे बंद िकये बैठे थे| "बाबा, जब आप पहले-पहल गांव महे आए थे और लोगो ने आपसे पूछा था िक आप कौन है, तिष्ठो आपने कहा था, महै साई बाबा हूं| साई बाबा का क्या अथर होतिष्ठा है?" दामहोलकर ने पूछा| उसके इस प्रतश पर साई बाबा महुस्करा िदए| "देखो, दो अक्षर का शब्द है-सा और ई| सा का अथर है देवी और ई का अथर होतिष्ठा है महां| बाबा का अथर होतिष्ठा है िपतिष्ठा| इस प्रतकार साई बाबा का अथर हुआ-देवी,महातिष्ठा और िपतिष्ठा|" 10 of 15 Contd…
  11. 11. "जनमह देने वाले महातिष्ठा-िपतिष्ठा के प्रतेमह महे स्वाथर की भावना िनिहतिष्ठ होतिष्ठी है| जबिक देवी महातिष्ठा-िपतिष्ठा के सेह महे जरा-सा भी स्वाथर नही होतिष्ठा है| वह तिष्ठुमहारा महागरदशरन करतिष्ठे है और तिष्ठुमहे प्रतेरणा देतिष्ठे है| आत्महदशरन, आत्महजान की सीधी और सची राह िदखातिष्ठे है|" साई बाबा ने समहझातिष्ठे हुए कहा - "वैसे साई बाबा को प्रतयोग परमहिपतिष्ठा परमहात्महा, ईशर, अल्लातिष्ठाला और महािलक के िलए भी िकया जातिष्ठा है|" 11 of 15 Contd…
  12. 12. "आप वासतव मे ही साई बाबा है|" सभी उपिसथत लोगो ने एक सवर मे कहा - "आपने हम सभी को सही रासता िदखाया है| सबको आपने ईशर की भिक के मागर पर लगाया है|“ "यह मनुषय शरीर न जाने िकतने िपछले जनमो के पुणय कमो को करने के पशात् पाप होता है| इस संसार मे िजतने भी शरीरधारी है, उन सबमे केवल मनुषय ही सबसे अिधक बुिदमान पाणी है| वह इस जनम मे और भी अिधक पुणय कमर कर सकता है| 12 of 15 Contd…
  13. 13. उसके पास बुिद है, ज्ञान है और इसके बावजूद भी वह मानव शरीर पाकर मोह-माया और वासना के दलदल मे फं स जाता है| इससे छुटकारा पाना असंभव हो जाता है| उसका मन रात-िदन वासना और सवाथर मे िलप रहता है| धन-सम्पित पाने के िलए वह कैसे-कैसे कायर नही करता है| मनुषय को इस दलदल से यिद कोई मुिक िदला सकता है, तो वह है गुर... केवल सदगुर| लेिकन आज के समय मे सच्चा गुर कहा िमलता है| सच्चे इंसान ही बड़ी मुिश्कल से िमलते है| िफर सच्चे गुर का िमलना तो और भी अिधक किठिन है|“ "सच्चे गुर िक पहचान कया है साई बाबा?" एक विक ने पूछा| 13 of 15 Contd…
  14. 14. "सच्चा गुर वही है, जो िशषय को अचछाई-बुराई का भेद बता सके| उिचत-अनुिचत का अंतर बता सके| आतमपकाश, आतमज्ञान दे सके| िजसके मन मे रतीभर भी सवाथर की भावना न हो, जो िशषय को अपना ही अंश मानता हो| वही सच्चा सदगुर है|" साई बाबा ने बताया और िफर अचानक उनहे जैसे कुछ याद आया, तो वह बोले - " आज तातया नही आया कया?“ "बाबा, मै आपको बताना ही भूल गया| तातया को आज बहत तेज बुखार आया है|" 14 of 15 Contd…
  15. 15. For more Spiritual Content Kindly visit: http://spiritualworld.co.in 15 of 15 End "तो आओ चलो, तातया को देख आये|" साई बाबा ने अपने आसन से उठिते हए कहा| साथ ही अपनी धूनी मे से चुटकी भभूित अपने िसर के दुपटे मे बांधकर चल पड़े|
  • Anil9007

    Nov. 3, 2015

साईं बाबा की जय-जयकार - http://spiritualworld.co.in दामोदर को सांप के काटने और साईं बाबा द्वारा बिना किसी मंत्र-तंत्र अथवा दवा-दारू के उसके शरीर से जहर का बूंद-बूंद करके टपक जाना, सारे गांव में इसी की ही सब जगह पर चर्चा हो रही थी| गांव के कुछ नवयुवकों ने द्वारिकामाई मस्जिद में आकर साईं बाबा के अपने कंधों पर बैठा लिया और उनकी जय-जयकार करने लगे| सभी छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष साईं बाबा की जय-जयकार के नारे पूरे जोर-शोर से लगा रहे थे| Read more on http://spiritualworld.co.in

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